21 दिन तक लॉक-डाउन का सख्ती से पालन करें वरना ...पछताओगे इटली जैसे

इसलिए लॉक-डाउन का सख्ती से पालन करें, और दूसरों से भी करवाएं। अन्यथा भारत जैसे देश में लापरवाही विनाश के उन आंकड़ों को जन्म दे सकती है जो हमारे लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं होंगे। 

ज़्यादा नहीं अपने पौराणिक विरासत रूपी ज्ञान का  स्मरण करें ....
विदुर को लगातार अपने गुप्तचरों से ,दुर्योधन के द्वारा किए जाने वाले षड्यंत्रों और तैयारियों की सूचना मिल रही थी।पांडवों को वारणावत जाने से रोकना, विदुर के वश मेंं नहीं था, परन्तु वे उनकी सुरक्षा तो कर ही सकते थे।वे लगातार उनकी सुरक्षा के उपाय सोचते रहते।
वारणावत जाने के पहले ,पांडव माता कुंती सहित, महात्मा विदुर को प्रणाम करने आये।विदुर ने अवसर देखकर युधिष्ठिर से पूछा,"वत्स, यदि जंगल में भीषण आग लग जाये, तो जंगल के कौन से जानवर सुरक्षित रहेंगे ?"
युधिष्ठिर ने उत्तर दिया,"तात,जंगल में आग लगने पर, स्वछंद और निर्भय घूमने वाले, शेर चीते,हाथी और सबसे तेज भागने वाले हिरण आदि सारे जानवर ,जंगल की आग में जलकर राख हो जायेंगे।परन्तु बिलों में रहने वाले चूहे सुरक्षित रहेंगे।दावानल के शांत होने पर वो पुनः बिलों से बाहर निकल कर, शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करेगें
"वत्स युधिष्ठिर, तुम्हारे उत्तर से मैं निश्चिंत हुआ।मेरी समस्त चिंतायें दूर हुईं।जाओ,सुरक्षित रहो।यशस्वी भव।"विदुर ने आर्शीवाद दिया।
कोरोना वायरस भी एक भयानक आग के समान है, जो लगातार सारी सीमायें लांघ रहा है।जो लोग 21 दिनो तक अपने घरों में रहेंगे, वो सुरक्षित रहेंगे और दुनिया पर राज करेंगे।
कृपया इस आग के ठंडे होने तक घर पर रहें 

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एक और ज्ञानी के संकलन का साझा आपसे किया जाने  का मन हो  रहा है समूचा विश्व कोरोना वायरस से आतंकित है। इसलिए, अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन हेतु, मैं कोरोना से जुड़ी कुछ मूलभूत जानकारियां संक्षेप में आपके साथ साझा करना चाहूंगा। 
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कोरोना वायरस हवा में प्रोटीनयुक्त आवरण में कैद डीएनए अथवा आरएनए के टुकड़े हैं जिनका आकार एक मीटर के अरबवें हिस्से तक होता है। आनन-फानन में तैयार चलताऊ मास्क इस छोटे जीव को आपके अंदर जाने अथवा बाहर आने से रोकने में 100% सक्षम नहीं हैं। इसलिए बेहतर क्वालिटी का मास्क उपयोग में लाएं। 
फिलहाल हम नहीं जानते कि कोरोना बाहरी वातावरण में कितनी देर जीवित रह सकता है, शायद कुछ घण्टे अथवा दिन... इसलिए बाहरी चीजों को छूने से परहेज करें। हाथों को अवश्य धोएं और हाथों को मुंह पर लगाने अथवा नाखून चबाने से परहेज करें। आप रोगी हैं अथवा नहीं, खांसते/छींकते वक़्त मुंह पर रुमाल लगाएं। 
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अगर कोरोना आपके सांस के द्वारा आपके फेफड़ों में दाखिल हो जाता है तो यह सबसे पहले आपके फेफड़ों के रक्षात्मक आवरण "एपीथीलियल कोशिकाओं" को निशाना बनाता है। किसी कोशिका में दाखिल होने के बाद कोरोना कोशिका की आंतरिक मशीनरी को हाइजैक करके अपनी असंख्य कॉपी तैयार करता है, तत्पश्चात उस बंधक कोशिका की हत्या कर लाखों की संख्या में तैयार हुए कोरोना अन्य कोशिकाओं को संक्रमित करने के मिशन पर निकल पड़ते हैं। 
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आपका इम्यून सिस्टम कोरोना से लड़ने के लिए कई प्रकार की फाइटर कोशिकाओं को भेजता है जो इन कोरोना वायरस को ढूंढ कर खत्म करने का कार्य करती है। अगर कोरोना की तादात हद से ज्यादा बढ़ चुकी है तो इम्यून सिस्टम आपको बचाने के लिए Mass Destruction का आदेश सुना देता है। इस दौरान इम्यून कोशिकाएं नये-नये एंजाइन्म के द्वारा बड़े पैमाने पर कोशिकाओं का संहार करती हैं जिसमें कोरोना के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्वस्थ कोशिकाएं भी मारी जाती हैं। 
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अधिकतर केसेस में आखिरकार इम्यून सिस्टम की ही जीत होती है पर यह कोरोना भी कम दुष्ट नहीं। ये कोशिश करते हैं कि इम्यून सिस्टम की फाइटर कोशिकाओं को ही संक्रमित कर सकें। इस तरह फाइटर कोशिकाएं भ्रमित हो आपस में ही मार-काट करने लगती हैं। ऐसे कई केसेस में आखिरकार कोरोना इम्यून सिस्टम पर भारी पड़ फेफड़ों के रक्षा कवच "एपिथिलियल कोशिकाओं" को चट कर जाते हैं। रक्षा कवच के हटते ही गैस एक्सचेंज को अंजाम देने वाली "अल्वीओलाई परत" अनावृत हो जाती है। तब शरीर में मौजूद दूसरे बैक्टीरिया मौके का फायदा उठाते हैं और अल्वीओलाई में मौजूद Air-transportation packets के सहारे रक्त में घुस जाते हैं और द्रुत वेग से अपनी जनसंख्या बढ़ाते हुए पूरे शरीर पर कब्जा कर लेते हैं। हवा के आवागमन हेतु मौजूद पैकेट्स बैक्टीरिया के द्वारा बन्द हो जाने के कारण रोगी सांस लेने में कठिनाई का अनुभव करने लगता है। और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है। 
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 कोरोना का कोई इलाज संभव नहीं है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण बुजुर्गों पर यह आफत ज्यादा भारी है। किसी भी महामारी में सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि शुरुआती दौर में संक्रमण की रफ़्तार को कितना धीमा किया जा सकता है। जाहिर है कि किसी भी देश में बुनियादी मेडिकल सर्विस सीमित होती है। अगर शुरुआती दौर में मरीजों की संख्या बेहद बढ़ जाए तो स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा चरमरा जाता है। रोग के फैलने की रफ्तार सीमित रहे तो रोगियों का उचित इलाज भी संभव है और साथ ही साथ शरीर को समय मिलता है कि हमारे शरीरों के आंतरिक इम्यून सिस्टम इस रोग पर विजय प्राप्त कर सकें। 

डॉक्टरों द्वारा कोरोना वायरस से मारे गए लोगो का पोस्ट-मोर्टेम करने के बाद इस वायरस से सम्बंधित बहुत अहम् जानकारी दी गयी गई |  

ये वायरस स्वास नली में जाकर म्यूकस की लेयर बना लेता है जो सॉलिड हो जाती है और स्वास नली बंद हो जाती है . इलाज़ के लिए डॉक्टर्स इसी नली को खोलने की कोशिश करते हैं और दवाई देते हैं, हलाकि इसमें कई दिन लगते हैं और पेशेंट क्रिटिकल हो जाता है. इससे बचने के कुछ उपाय है जो की नीचे है - 

१. दिन भर समय समय पर गरम पेय का सेवन करें जैसे की कॉफी, चाय, सूप, गरम पानी| हर २० mins में गरम पानी पिए| ऐसा करने से मुँह सूखेगा नहीं और अगर कोई वायरस आ गया होगा तो वो पेट में चला जायगा और गैस्ट्रिक juices की वजह से ख़तम हो जायगा इसके पहले की वो lungs तक पहुंच के पकड़ बना पाए । 

२. हर दिन antiseptic जैसे की विनेगर या लेमन या साल्ट और गरम पानी से गरारे करें । 

३. वायरस बालो और कपड़ो में चिपक जाता है| किसी भी साबुन या डिटर्जेंट से वो मर जाता है| इसलिए बाहर से घर आते ही सबसे पहले बिना कहीं बैठे सीधे बाथरूम जाके नहा लें | अगर कपडे धो नहीं सकते तुरंत तो धुप में रख देख कपड़ो को । 

४. मैटेलिक जगहों पर वायरस 9 दिन तक रह सकता है . इसलिए ऐसी कोई चीज़ हो तो उसे जरूर साफ़ करें|  सीढ़ीओं की रेलिंग, डोर हैंडल्स आदि को छूने से बचे और घर साफ़ करते रहे । 

५.  सिगरेट न पियें । 

६. हर 20 mins में 20 sec के लिए किसी भी झाग वाले साबुन से अच्छे से हाथ धोएं |

७. सब्जियां और फल खाएं | Zinc और विटामिन-c दोनों को बढ़ाने की कोशिश करें। 

९. एहतियात बरते की आपको वायरल फीवर या नार्मल कोल्ड और फ्लू ना होने पाए क्यूंकि उससे इम्युनिटी सिस्टम (रोग से लड़ने की शरीर की क्षमता) कमजोर हो जाता है | ठंडा पानी या ठन्डे पेय ना पिएं । 

१०. अगर आपको इन दिनों कभी भी गला ख़राब या खांसी या खराश लगे तो ऊपर बताये गए सुझावों को तुरंत प्रयोग ही करें | वायरस शरीर में ३-४ दिन इसी तरह गले में रह कर lungs में पहुंच जाता है | इसलिए बचाव के तौर पर एवं कोई भी लक्षण आने पर ऊपर बताय तरीके अपनाये |