भाजपा सरकारी नौकरियों में  नेताओं के 5 साल कार्यकाल के जैसे ठेका प्रथा लागू करना चाहती है: अखिलेश

भाजपा सरकारी नौकरियों में  नेताओं के 5 साल कार्यकाल के जैसे ठेका प्रथा लागू करना चाहती है: अखिलेश
Yogi - Akhilesh

t4unews:समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार अब युवाओं के विरोध में आ गई है निजी करण और सरकारी संपत्ति विभाग को बेचने की जो कवायद किया जा रहा है वह बहुत गलत बात है । 

समूह ख व ग की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है जिससे सरकारी नौकरियों में भी ठेका प्रथा लागू हो जाएगी। परीक्षा से आए समूह ख व ग के कर्मचारियों को पहले पांच साल तक संविदा पर रखा जाएगा। भाजपा केवल अपने राजनीतिक विस्तार और सत्ता पर एकाधिकार को ही विकास मानती है।साथ ही साथ भाजपा इस मुद्दे को हमेशा कायम रखना चाहती है कि बेरोजगार मुद्दे पर हमेशा हर 5 साल में युवाओं को जलील करते रहे और मजबूर करते रहे।

उन्होंने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि पांच वर्ष की कठिन संविदा प्रक्रिया में छंटनी से वे जब बच पाएंगे तभी पक्की नौकरी मिल पाएगी। अभी तक भर्ती के लिए चयनित कर्मी को एक या दो वर्ष के प्रोबेशन पर नियुक्ति मिलती है और उसे नियमित कर्मी की तरह वेतन व अन्य लाभ प्राप्त होते रहे हैं। राज्य सरकार के नए नियम लागू होने पर चयनित कर्मी को नियमित सरकारी सेवकों को अनुमन्य लाभ नहीं मिलेंगे। उस पर सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 भी लागू नहीं होगी। यानी इन संविदा कर्मियों का कोई अधिकार और भविष्य नहीं होगा। सरकार जब चाहे उन्हें बाहर निकाल सकेगी।इस प्रकार की तानाशाही से शासन के उच्च अधिकारियों की मोनोपोली और हठधर्मिता तथा नादिरशा ही चलेगी वही शासन को भी संविदा कर्मियों के रूप में वेतन कम देने को होगा और उनकी बहुत सारी लाइब्रेरी का वर्णन कम हो जाएगी जो वह शासकीय कर्मचारियों के अवसर प्रदान करते रहे हैं संविदा कर्मी को कार्य अवधि में पूरा वेतनमान भी नहीं मिलने वाला है।

उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार का इरादा है कि आगे से सुरक्षित नौकरी किसी को नहीं मिले।अगर नौकरी मिल भी जाए तो हर 5 साल बाद जब जब उनका शासनकाल रहे उसी नौकरी को उसी नए नए लोगों को देने या दिखा दिखा कर एक लॉलीपॉप की तरह चस्का लगवाने का कार्य बीजेपी कर रही है। कर्मचारी को संविदा काल में पदनाम के पहले सहायक पदनाम से नियुक्ति मिलेगी। उसकी दक्षता परीक्षा में 60 प्रतिशत से कम अंक आने पर सेवा समाप्त हो जाएगी। इस तरह तो संविदा काल का कर्मचारी पूरी तरह बंधुआ मजबूर बनकर रहेगा। निश्चय ही भाजपा सरकार प्रदेश के नौजवानों का भविष्य अंधेरे गर्त में ढकेलने का काम कर रही है। उसकी मंशा युवाशक्ति के पूर्ण शोषण और उसे कुंठित कर अपने स्वामिभक्त सेवक में तब्दील कर देने की है। युवा विरोधी कदम उठाकर भाजपा ने अपना असली चेहरा उजागर कर दिया है। इसका सदन से सड़क तक विरोध होना स्वाभाविक है। आक्रोशित युवा भाजपा को वर्ष 2022 में अवश्य सबक सिखाएंगे।इस प्रकार की घोषणा एवं अमल से युवाओं का भविष्य आने वाले 20 से 25 सालों तक अंधकार में है जिससे युवाओं में आक्रोश है और बीजेपी के प्रति एक विरोध भावना का लहर पैदा होता जा रहा है।