अपनी भावी पीढ़ी को क्या सौगात दें सकेंगे ?

JSPSRS जल संवर्धन और शुद्धिकरण के जन चेतना के कार्यक्रम अपने NGO के माध्यम से चला कर सभी को इसकी आवश्यकता पर सोचने को विवश कर रही है की यदि अपने ठोस और द्रव के गंदगी की सफाई हम स्वयं नही करेंगे तो अपनी भावी पीढ़ी को क्या सौगात दें सकेंगे ?

अपनी भावी पीढ़ी को क्या सौगात  दें सकेंगे ?
Water treatment plant

T4unews:यदि हम  नादान और अबोध है तो अपने माता के आंचल को या गोद को गंदा कर सकते हैं इसमें हमारा कोई दोष नहीं लेकिन जब हम हम बड़े हो जाते हैं और  दुनिया भर की जानकारी को अपने दिमाग में संजोकर रख लेते हैं की सफाई या शुद्धता क्या होती है फिर  उसके बावजूद  अगर हम अपनी माता या  प्रकृति को दूषित करें गंदा करें,  हमारी कल कल बहती शुद्ध नदियों को अपवित्र करे तो  हमसे बड़ा अधम पापी  और नीच कोई नहीं हो सकता।   आज हम अपने दैनिक जीवन के कार्य , घरों में , होटलों में,  रेस्टोरेंट में हॉस्पिटल में बड़ी आसानी से पानी के माध्यम से अपनी जरूरतें  पूरा तो कर लेते हैं परंतु क्या कभी हमने सोचा है कि जिस 50 ग्राम की मल मूत्र को  अपनी नजरों से दूर और अपने संपर्क से दूर  करने के लिए हम 10 से 15 लीटर पानी का उपयोग इसे बहा देने मात्र के लिए करते हैं तो  इस बहुमूल्य पानी का होता क्या होगा ? 
  हम सभी जानते हैं कि जहां पानी का अभाव या पानी का अकाल होता है वहां लोग कई किलोमीटर दूर से पानी अपने सिर पर गगरिया रख  कर या साइकिल या कावर के माध्यम से  पानी को जब ढो कर लाते हैं तो उसकी कीमत अमूमन प्रति लीटर ₹5 से 10 प्रति लीटर  के बराबर की हो जाती है ।  यहां तक कि जब हमको अमूल्य पानी को  सैकड़ों फीट जमीन के नीचे से ऊपर अपने 50 मीटर 30 मीटर ऊपर पानी की छत के ऊपर  पानी टंकी में प्रेशर से पानी को पहुचाने  के लिए जब ले जाते हैं तो उसके लिए लगने वाले संसाधन और बिजली  की कीमत अमूमन 10 से ₹15 तक की हो जाती है ।अब आप कल्पना कीजिए आपकी एक बार के मूत्र विसर्जन या नहाने धोने के बाद,दैनिक उपयोग के बाद  अगर आप में रोजाना 300 से 400 लीटर का पानी एक छोटे परिवार के द्वारा इस पृथ्वी को उल्टा  लौटा  देते है ।  जिसे जमीन के अंदर से  खींचकर शुद्ध होकर ऊपर तक लाने के लिए कितने संसाधन और समय लगते हैं कुदरत को उसको आपने सही रूप में बर्बाद कर  वापस नही लौटाते  है जों की अन्य लोंगो के लिऐ  भी जीवन की आवश्यकता है।  परंतु क्या हम इस आवश्यकता को अपनी स्वार्थ की पूर्ति करने के बाद  इसे वापस पृथ्वी पर या कुदरत में सही ढंग से डिस्चार्ज नहीं कर सकते?  क्या यह हमारा नैतिक दाइत्व नहीं है ? इस बात को हम अच्छे से होशियार होने के बाद भी समझना  नहीं चाहते कि अगर हमारा काम बनता तो भाड़ में जाए जनता।   आज इतनी बेदर्दी से बाहर जाने वाले पानी को जो बड़े नदी नालों में मिलती है वह एक महान नदियों  में जाकर विसर्जित हो जाती है।  इसको यदि प्रत्येक कॉलोनी वाले , फेक्ट्रि  वाले ,  हॉस्पिटल- होटल वाले यदि अपने ही यहां जल शुद्धिकरण  प्लांट लगाकर इसे शुद्ध करते हुए आसपास के प्लांट वाटरिंग , बगीचे की सिंचाई करने के लिए या अन्य किसी कारणों में  रोड , बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कारणों जैसे कार्यों में  उपयोग कर सके कि हमारे देश दुनिया और प्रकृति नहीं हमारी इस पृथ्वी के लिए हमारे द्वारा दिए गए कर्ज की उधारी  चुकाने के सामान की हो सकती है । इस कार्य हेतु  प्रशासन ने अपने प्रदूषण विभाग की संरचना करते हुए कई प्रकार के नियम कायदे कानून बनाए हैं जिससे कि हम अपने पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए और कुदरत के द्वारा ली गई वायु एवं पानी को उसी प्रकार वापस लौटाने के लिए  जनहित में देश हित में पर्यावरण हित में कार्य करें परंतु जब तक प्रशासन का आया कानून का डंडा सर पर नहीं पड़ता या जन चेतना नही हो  तब तक लोग इसको हल्के  में लेते हुए हजारों साल से इस कुदरत की नायाब  निधि को बर्बाद करते चले  जाएंगे । परंतु ऐसा नहीं है कि इस क्षेत्र में कदम नहीं उठाया जा सकता है । 

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छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखें या कॉलोनाइजर ,  होटल वाले ,  हॉस्पिटल वाले इन बातों के लिए सजग व सतर्क हो जाएगी जिससे उनकी रोजी-रोटी देश-दुनिया प्रकृति कुदरत इत्यादि चल रही है उसके प्रति ईमानदारी बरतते हुए इस प्रकार किए गए  प्रदूषित जल को सही मात्रा में सही अवस्था में ठोस एवं उसके अन्य प्रदूषण  को दूर करते हुए वापस कुदरत  को लौटा देने और जमीन में वापस ऐसे पानी  डिस्चार्ज करे  जो एक रीसाइक्लिंग की तरह उन्हें फिर से नवजीवन देते हुए लोगों के उपयोग में कल्याणकारी जल के रूप में प्राप्त हो सके।  यदि आपको पता चल जाएगा  इन सब बातों से सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव तो उन लोगों को पड़ता है जिनके पास में ऐसे संसाधन नहीं है कि जो आपके द्वारा छोड़े  इस प्रकार के दूषित एवं हैवी मेटल  वाले जल को उपयोग करने से पूर्व संशोधित कर सके । हमारा  यह एक नैतिक दायित्व बन जाता है कि देश में और लोगों के सभी प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं के समान  कुदरत,  प्रकृति को हम शुद्ध रखने में ऐसी योजनाओं का लाभ लें जिनके माध्यम से हम प्रदूषित जल को ठीक कर सकते हैं।  थिंक  फॉर यूनिटी के द्वारा ऐसे प्रकार के प्रदूषित जल को शुद्ध करने के लिए कई इंजीनियरिंग कंपनीज़  है जिसमें देश के प्रतिभावान इंजीनियर , इंडस्ट्रीज लोग इस कार्य में मदद करते हैं और बहुत कम  लागत नहीं इस प्रकार के प्लांट स्थापित किए जा सकते हैं जिनसे हम पृथ्वी का कर्ज उतार सकते हैं और मानवता को कायम रख सकते हैं  ।