राहत पॅकेज ...बनाम ऋण चुकाने के लिए और ऋण लेना तथा उसको चुकाने के लिए और ऋण....

मोदी सरकार के द्वारा राहत पैकेज के रूप में ₹20 लाख करोड़ का जो पैकेज प्रदान करने की घोषणा की गई है वह आर्थिक समीक्षक एवं जो इस फील्ड में महारत है उनके विश्लेषण करने के बाद और विपक्ष की भूमिका से इसे तलाशने के बाद जो कुछ सामने दिख रहा है वह भी सत्य है कि अगर नये सिरे से गिनती गिनने या कार्य या स्टार्ट करने की तिथि आज की डेट से कोशिश की जाए तो यह 20 लाख करोड़ के काम के हो सकते हैं । आर्थिक जानकार सलाहकार और एक्सपोर्ट लोगों की राय तथा धुर विपक्ष की भूमिका से यदि मोदी सरकार द्बारा लिए गए इस निर्णय को तराश कर देखा जाए तो प्राप्त होता है कि पूर्व से लिए कर्ज और व्यापारियों के साथ किसानों के द्वारा होने वाले रोज के खर्च तथा आगे की व्यवस्था के लिए जिस प्रकार उन पर विपदा आन पड़ी है उसकी भरपाई कैसे हो? यह यह भी सही है कि जो बीत गई उस पर विचार करने की वजह आगे चला जाए परंतु जो बीत गई और जो लॉक डाउन के रूप में लोगों के ऊपर एक जिम्मेदारी का कर्ज़ यदि दारी लोगों के सर आन पड़ी है उस पर कैसे नियंत्रण पाया जा सकेगा ? विपक्ष के सीताराम येचुरी के द्वारा भी सही व्यक्ति भी दिया गया है कि यदि मजदूरों, खर्च करने वाली जनता या किसानों या गरीब तबकों तक यदि उनके जेब में कोई भी पैसा मजदूरी के रूप में या राहत के रूप में नहीं पहुंचेगा तो मार्केट में पैसा कहां से आएगा? जब लोगो को उत्पादन करने वालों की चीजें खरीदने कि उनके पास में शक्ति नहीं रहेगी या लोगों को अपने देश के द्वारा उत्पादित की जाने वाली स्वदेशी चीजों का मूल्य विदेश से आने वाली सस्ती चीजों की तुलना में अधिक लगेगा तब वह उसे कैसे स्वीकार कर पाएंगे ? क्योंकि जीना तो इसी जीवन में ही है इसी युग में ही है आज ही है अतः कल की कल्पना में दिवास्वप्न देखना संभावित हो अगर परिणाम अच्छे भी होने के आसार हो तो सपने देखना कोई बुराई नहीं है । परंतु आज की वर्तमान को देखते हुए भी नीति बनानी चाहिए निम्नलिखित उद्गार श्री हिमांशु खरे जी के हैं जो सोशल मीडिया के द्वारा प्राप्त हुए हैं उसका यहां पर प्रकाशन किया जा रहा है ।

राहत पॅकेज ...बनाम  ऋण चुकाने के लिए और ऋण लेना तथा उसको चुकाने के लिए और ऋण....

t4unews:निम्नलिखित उद्गार श्री हिमांशु खरे जी के हैं जो  सोशल मीडिया के द्वारा प्राप्त हुए हैं उसका यहां पर  प्रकाशन किया जा रहा है ।

राहत पैकेज से कोई खास राहत नहीं
आज केंद्र सरकार द्वारा कोविड 19 की वैश्विक महामारी से उपजे उद्योग-व्यापार में भीषण संकट से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राहत पैकेज की घोषणा की गई जिसकी बहुत दिनों से उम्मीद थी कि अब शायद कुछ अच्छा होगा।

आज जब वित्त मंत्री द्वय अपनी बात रख रहे थे तो यह प्रतीत हुआ कि सरकार उद्योग-व्यापार जगत की कठिनाइयों से अवगत है क्योंकि देश के सभी प्रमुख व्यावसायिक संगठनों ने जिसमें जबलपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स भी सम्मिलित है, हर स्तर पर व्यवसायियों के मांगों को उठाया है।

मेरी समझ से राहत उन्हें प्रदान की जाती है जो तकलीफ में होते हैं। आज जो तकलीफ में हैं, चोटिल हैं, परेशान हैं, उन्हें राहत की आवश्यकता है। रिलीफ या राहत पैकेज में नई इबारत लिखने अर्थात कल को सुनहरा बनाने का अधूरा प्रयास किया गया है। अधूरा इसलिए क्योंकि *आज* यदि सशक्त है, सम्पूर्ण है तभी *कल* शक्तिशाली होगा। आज जब उद्योग-व्यापार जगत वेंटीलेटर पर है, बैंकों के ऋण, ब्याज की मार, वित्तीय संकट से जूझ रहा है तो शायद सरकार को वर्तमान परिदृश्य में ब्याज एवं ऋण पर सहायता प्रदान करना थी ताकि एक व्यापारी का वित्तीय प्रबंधन कुछ हद तक सुधर पाता लेकिन सरकार ने आज की चिंता बहुत नहीं करते हुए कल के सपने बुने हैं। ऐसे सपने जिन्हें हम शायद बंद आंखों से या आंखें खोलकर भी नहीं देख सकते। ऋण चुकाने के लिए और ऋण लेना तथा उसको चुकाने के लिए और ऋण। सरकार ने इस परिप्रेक्ष्य में अपनी अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग या साख का ध्यान रखा है एवं अपने राजकोषीय घाटे का भी ध्यान रखा है तथा राहत पैकेज में इसे संतुलित करने का प्रयास किया है लेकिन सरकार यह भूल गयी कि सही मायनों में राहत प्रदान की जाना थी और यह अवसर वह गंवा बैठी है। जनता के लिए, जनता से, जनता के द्वारा - यह हमारा संविधान है। जनता से सरकार है सरकार से जनता नहीं।

लेखक श्री हिमांशु खरे
वरिष्ठ उपाध्यक्ष
जबलपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री