क्या है वेंटिलेटर...

क्या है वेंटिलेटर...
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t4unews :कोरोना वायरस के पूरी दुनिया में फैलने के बाद वेंटिलेटर शब्द काफी प्रचलन में आया है। वेंटिलेटर का इस्तेमाल आमतौर पर तब होता है जब मरीज का शरीर साथ छोड़ने लगता  है और खुद से सांस लेने की स्थिति में नहीं रहता है। तब लोग कहते है  कि उसकी जिंदगी अब वेंटिलेटर के भरोसे है अर्थात कभी भी वह चल बसेगा । इसकी उपयोगिता कृत्रिम श्वास व्यवस्था बनाने कि होती है जब मनुष्य का मुख्य अंग फेफड़े और हृदय साथ देना बंद  कर देते है उस समय वैज्ञानिको  और डाक्टर्स  द्बारा बाह्य तरीकों से रोगी या  पीड़ित को सहारा देने का एक प्रयास होता है कि वह जिंदगी के लिऐ संघर्ष कर सके । संपन्न देश अपनी मेडिकल व्यवस्था को अच्छी इन्ही सब उपकरणो से आंकते है । पर जब आपदा आती है और इस सुनामी और अव्यवस्था में किसे देखें किसे बचाए किसे बिस्तर पर और किसे जमीन पर लिटाये का,  पशोपेश हो जाता है तब ये सभी धरे  के धरे रह जाते है । 
वर्तमान में मेडिकल सेवाओं के लिए उपकरणों की विपन्नता उसी प्रकार दर्शा रही है जिस प्रकार गरीब देशके लोग  अपने रुपयों पैसे को बचाकर चलते हैं कि आड़े वक्त के समय हमें किसी के आगे हाथ ना पसारना पडे । हम यह भी  देखते हैं कि हम यह उस समय  हमारा संग्रह या समान ठीक से काम करें  या काम आ सके , जब हम पर आपदा आए । ठीक उसी प्रकार वेंटिलेटर और सभी प्रकार की दवाइयां जो मार्केट में अनुपलब्ध हैं या जिसका वैक्सीन या उपचार इस दुनिया में नहीं है या अभी तक नहीं बन सका है उसके लिए पूरा विश्व का मेडिकल विभाग भयभीत हो  रहे हैं और आने वाले भयावह महामारी  स्थिति को आंक रहे हैं कि क्या ऐसी स्थिति ना हो जाए कि हमारे हॉस्पिटल , क्या रोड,  क्या घर के कमरे भी कम पडने लग जाए ।हम कहां और कैसे  इस आपदा से निपटे  ? भले ही  कोरोना  को सोशल डिस्टेंसिंग और क्वरेण्टाइन के माध्यम से विजय पाया जा सकता है परंतु यही छोटी सी ज्ञान यदि  किसी कि  लापरवाही से  विशालकाय रूप में एक बांध के फूटने से जो उत्पन्न जल प्लावन कि होता है के समान हो जाये तब ऐसी स्थिति में क्या हाल होगा?  उसको भापते  हुए ही सब के हाथ-पांव फूल रहे हैं और सभी सी आशंका से ग्रसित हैं कि काश हम इस पर जल्द से जल्द विजय पा जाए ।  चाहे भले ही हमें संपूर्ण लॉक डाउन क्योँ ना  करना पड़े । चाहे भले ही हमें नौरात्रि उपवास ही  रखना पड़े या किसी भी प्रकार की हमें कष्टों का सामना करना पड़े परंतु यदि हम सोशल डिस्टेंसिंग या  स्वयं को क्वॉरेंटाइन करते हुए यदि हम इस प्रकार की  तांडव रचने वाली वायरस की महामारी से मुक्ति पा सकते हो तो यह भी संभव है कि अगर अपने इलाज के लिए हमें नीम का कड़वा रस भी  पीना पड़े तो उसे पीकर शरीर को और स्वयं को स्वस्थ रखा जाना चाहिऐ । आइए देखें एक नजर में की वर्तमान में पूरे विश्व में कुल पूरे भारत में और हमारे स्वयं की जिले में क्या स्थिति है इस महत्वपूर्ण उपकरण वेंटीलेटर की  :
-ये तो बहुत अच्छी बात है  कि 80 फीसदी मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित बिना अस्पताल गए ठीक हो गए हैं।

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18432 वेंटिलेटर हैं भारत में सार्वजनिक क्षेत्र में केवल अभी तक सर्वे के अनुसार । 

-कुल  40,000 वेंटिलेटर देशभर में उपलब्ध हैं निजी
क्षेत्रों में 
. वर्तमान में 40 लाख वेंटिलेटर्स की पड़ सकती है जरूरत,
अगर हालात बिगड़े तो
- जानकारी के अनुसार 800 से 1,000 वेंटिलेटर सिर्फ मुंबई में हैं, देश में सबसे ज्यादा इसके अलावा तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इनकी संख्या क्रमशः 1,500 और 1,800 हैं। बेंगलूरु शहर में लगभग 400 वेंटिलेटर हैं, जबकि केरल में 5,000 हैं। 30000 हजार वेंटीलेटर तैयार करने का ऑर्डर दिया है भारत सरकार ने बड़ी कंपनीज़ को । यदि एक दिन में 10 वेंटीलेटर भी उत्पादित होंगे तो कम स कम एक साल लगेगा इसे बनाने में । 
रक्षा क्षेत्र के उपकरणो को बनाने के बजाए अंबानी अडानी या टाटा को इस क्षेत्र में मेक इन इंडिया करते हुये क्वालिटी प्रोडक्ट दे  कर देश का नाम , काम ऊँचा  करने का समय अब आ चुका है ।