खर्चीली शादियां और दिखावटी रिवाज को छोड़े

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खर्चीली शादियां और दिखावटी रिवाज  को छोड़े

T4unews:-खर्चीली शादियां और दिखावटी रिवाज  की जितनी भी परंपरा है या जो उत्सव में की जाती है इसकी सख्त मुखालफत होनी  चाहिए  । परंतु यदि यह परंपरा वर या वधू की  अभिभावकों द्वारा आकृष्ट,  विवश या मोह वश  या उनके उन्नत भविष्य की कामना को करते हुए मेहर , दहेज के रूप मेँ  लिया या दिया जाता है तो वह चाहे हिंदू धर्म हो या मुस्लिम धर्म हो , भारत में रहने वाला कोई भी संप्रदाय का हो उनकी भावनाओं  पर भरोसा करना चाहिए और इस प्रकार की किए जाने वाले व्यर्थ खर्च और आडंबर से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए ।  फिर भी यदि कोई इस प्रकार की परंपरा को या अपनी खुशी ही देना लेना चाहता है तो उसे अस्वीकार भी नहीं किया जा सकता है । परंतु ध्यान केवल इस बात का रखना चाहिए कि इस प्रकार के धन का सदुपयोग हो । कहने का अभिप्राय यह है कि यदि कोई अपनी यथाशक्ति एक छोटा सा बर्तन भी दहेज में देता है या एक छोटा सा गिफ्ट का राशि या कोई भी अमाउंट या सोना या किसी भी प्रकार का एक द्रव्य पदार्थ नव विवाहित वर- वधु को प्रदान करना चाहता है तो उसे हम मना तो नहीं कर सकते परंतु हां उसका सही प्रकार से उपयोग भविष्य में हो सके इसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए ।अमूमन  देखा गया है कि इस प्रकार की मिली भी राशि पर वर पक्ष के पिता द्वारा या माता द्वारा या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा इस राशि का उपयोग उनके घर की कई अन्य कार्य जैसे घर मेँ ब्याह योग्य किसी बची हुई लड़की की शादी,  घर बनाना या वाहन खरीदना या अन्य प्रकार की चीजों में उपयोग करने को दर्शाते हुए खर्च किया जाता है । यह सर्वथा अनुचित है  हमें उन भावी  नवजीवन के दंपतियों की उन्नत भविष्य के लिए इस प्रकार प्राप्त की गई राशि को सुरक्षा निधि के रूप में या म्यूचुअल फंड के रूप में या किसी अन्य प्रकार की प्रायोगिक या व्यापारिक  कार्य हेतु लगाना चाहिए।  जिससे कि इस देश की  ज़ी डी पी  भी बढ़े और साथ ही साथ उनके आर्थिक सुरक्षा या आर्थिक  उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त हो सके । जैसा कि इस्लाम में बताया गया है कि जो मेहर की राशि प्रदान की जाती है वह महिलाओं के  भावी जीवन की सुरक्षा या उनके आने वाले भविष्य के उनकी सुरक्षा का आकलन बतौर किया जाता है  वही चीज हिंदुओं में भी  दहेज उनके सुखद या उन्नत भविष्य के लिए ही किया जाता है परंतु अमूमन यह देखा गया है कि गार्जियन वर पक्ष के लोग अपने द्वारा किए गए प्रयास मेहनत एवं खर्च का आकलन आरंभ से लेकर के शादियों की जीवन तक का जो भी बनता है उसका वह सामने वाले कन्या पक्ष से लेना वसूलना या प्राप्त करना पसंद करते हैं ।  जो हास्यास्पद है अपने बच्चे  को बेचने के समान है । जो  देश में इतनी सारी योजनाएं हैं जिनके द्वारा हम अपने इस प्रकार के प्राप्त राशि को सही जगह पर निवेशक कर सकते हैं या एक अच्छे बिजनेस में , खेती में लगा कर के उसे उन्नत जीवन का एक रास्ता बना सकते हैं वो करना पसंद नही करते ।   मैं यहां पर सभी लोगों से आग्रह करना चाहूंगा कि जहां उन्हें ज्यादा से ज्यादा अपने पैसे की बढ़ोतरी आने वाले लंबे समय के बीच मिलती है ऐसी जगह पर यदि भी इस प्रकार की राशि का नियोजन करें तो यह उनके उन्नत एवं सुखद भविष्य के लिए भी लाभदायक होगा और साथ ही साथ देश की उन्नति और तरक्की भी संभव हो सकेगी । इस प्रकार से प्राप्त धन को किसी प्रकार की म्यूचुअल फंड में 15 से 25 वर्षों के बीच के लिए नियोजित कर देने का सलाह देना हम चाहेंगे । जो उन्हें आने वाले भविष्य में एक करोड़पति अरबपति के रूप में पेंशन के रूप में उन्हें एक सिक्योर लाइफ प्रदान करने का कोशिश करेगी  । इस प्रकार देखा जाए तो हमारे इस देश में हर प्रकार की जातियों में अमूमन नए जोड़ों का बंधन इतना होता है कि वह अरबों खरबों का व्यापार चला जाता है जिसमें फिजूलखर्ची और दिखावटी के नाम पर अनेक प्रकार के व्यर्थ खर्च किए जाते हैं जो कि आवश्यक नहीं होते और अनावश्यक रूप से इस बर्बादी को करते हुए हम अपने आप को समाज में प्रतिष्ठित या बहुत ज्यादा संपन्न दिखाने की कोशिश करते हैं जिसका कोई मूल्य नहीं होता  इस कुरीतियों और अवधारणाओं से मुक्ति पार्टी वे कई उन्नत समाज के लोगों ने  रात्रि कालीन बारात निकालना , डेकोरेशन लाइट जनरेटर फटाके धूम-धड़ाके एंड बेंड  सेंड सारी चीजों को तिलांजलि दे दी है और बहुत ही शादी तरीके से अपने लोगों के बीच केवल खाना खिलाना और उत्साह के बीच करते हुए जिस प्रकार से इस आयोजन को कर रहे हैं । निस्संदेह उसमें उनके परिवार और उस समाज के लोगों की बहुत सारी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है  हमें भी इस प्रकार के बनते हुए हर नए जोड़े के बीच जाकर इस विकल्प को समझाना बताना और अच्छे से समझाना चाहिए कि प्राप्त हुए कुछ हजारों से लेकर लाखों रुपए तक के इस नगर या अन्य किसी प्रकार के वैकल्पिक खर्च को इस दिशा में मोड़ा जाए जो लोगों को एक सारगर्भित प्रयास के रूप में लिखें जिससे उनका जीवन आर्थिक रूप से सुदृढ़ संपन्न और देश को एक बहुत बड़ी जीडीपी प्रदान कर सकें  ।