क्या कोरोना वायरस 21 दिन के लाक्ड आउट के बाद समाप्त हो जाएगा...?

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t4unews:दोस्तों रात 8:00 बजे देश के कमांडर माननीय प्रधान मंत्री श्री मोदी जी द्बारा दिये गए राष्ट्र के नाम संदेश  जिसमें  पूरे 21 दिनों के लिए लॉक्ड आउट या धारा 144 का घोषित हो जाना जो एक  आपात काल मेन मेड प्राब्लम  के समान है बहुत ही आवश्यक हो सकता है।  किंतु हैरतअंगेज विषय यह भी  है कि अभी तक इतने बड़े-बड़े युद्ध और इतने बड़े आपातकाल के बाद भी भारतीय रेलों का या भारत के ऐसे कई लाइफलाइन चीजों का बंद होना जहां संभव नहीं हो पाया था वहां इस एक कोरोना covid - 19 वायरस ने यह संभव करके दिखा दिया है कि देश दुनियाँ  बहुत ही आपात और गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। 

मुंशी प्रेमचंद की कहानी के अनुसार जब बाढ़ आती है तो बाढ़ में एक लकड़ी के  ढूंढे के सहारे अपने जीवन को बचाने के लिए एक व्यक्ति एक सर्प  और एक बिच्छू जब एक ढूंढी पर ही अपनी सवारी का सहारा अथाह जल राशि बाढ़  से बचने के लिऐ चुपचाप सवार  होते हुए एक साथ बहते हुए किनारे को लग जाते हैं । वही  दृष्टांत अभी हम सभी को देखने को मिल रहा है कि इस समय हम सभी प्रकार की अनेक विषमताओं और अनेक  भेदभाव और विषयों को बुलाकर अभी केवल अपनी प्राण रक्षा हेतु अपना काम करें परंतु,   यह बात एकदम गले नहीं उतरती की अचानक शेर आया शेर आया या कौवा कान ले गया के संबंध की जानकारी लेते हुए यदि हम जिस चीज के विकल्प के बारे में हम नहीं जानते कि इसका दवा क्या है?  इसका रोकथाम क्या है ? उसमें जैसे कुछ जब कुछ समझ में ना आए तो आंख बंद करके सो जाएं या घर के कोने में एक बिल में घुस जाएं वाली बात तो सही होती है । परंतु ऐसा हम डर कर कब तक जी  सकते हैं?  क्या हमारे  मानव जीवन या मानव सभ्यता के पास इसका कोई और अन्य विकल्प नहीं है ? इस वक्त  विकल्पों का खोज करना भी उतनी ही आवश्यक है जितना कि अभी लॉक्ड आउट  करके 14 घंटे से लेकर 21 दिन और फिर जैसे जैसे पड़ोसी या अन्य राष्ट्र जान बचाने के लिऐ कर रहे है वैसे ही हम भी करें । शुतुरमुर्ग के समान रेत  में सिर छिपा लेने से समस्या खत्म नही होगी । लोगों की आवाजाही आवा गमन को बंद करते हुए इस प्रकार के विषाणु या बेक्टीरिया को विस्तार से रोक दिया जाए  सोचना गलत है क्योकि बेक्टीरिया या वायरस तो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी जिंदा रहने कि खासीयीयत रखते है परंतु जीवन इतना सहज नहीं है कि एक जगह बैठे बैठे ही सारे कार्य हो जाए बहुत प्रकार की आवश्यकताएं लोगों को घर से बाहर वितरण या संचरण करने को मजबूर करती है।  ऐसे समय इसकी विधिवत  प्रक्रिया क्या होगी कि आम जनमानस भी अपने दैनिक रोजमर्रा की चीजों को लेने के लिए क्या विधायक प्रतिनिधि या पार्षद प्रतिनिधि या मोहल्ला के प्रतिनिधि के द्वारा अपील करें या फिर स्वयं निकलकर की पुलिस की बर्बरता या पुलिस की  कठोर कार्रवाई जैसे लट्ठ ,  गोली का शिकार होते रहे।  इस वीडियो में श्री डॉक्टरविश्वरूप राय चौधरी फैजाबाद वाले  के द्वारा बताई गई इस लिंक में सन 2016 से लेकर अभी तक जिस प्रकार वायरस या बैक्टीरिया के संबंध में अपनी राय व्यक्त की गई है और किस प्रकार रोजाना खानपान  के द्वारा ही हम इन जानलेवा कष्टों , बीमारियों का इन सब चीजों से  बेहतरीन इलाज कर सकते हैं और वो काम कर सकते हैं  जिसे बड़ी बड़ी दबाइए भी नही कर पाती है । इन विचारों और ज्ञान जैसी चीज को पाकर हम धन्य हुए और लोगों तक इस बात को फैलाने के लिए इसे मजबूर हुए कि डर कर जीने से बजाय  सही मायने में ज्ञान का प्रचार प्रसार भी आवश्यक है।  ठीक है छूत की बीमारी या अब इस प्रकार के अनाम बैक्टीरिया की बीमारी जिसका हमें अभी तक कोई बोध नहीं है कि वह कहां छुपा बैठा है और आगे क्या क्या कहर ढायेगा  इससे  हमें डरने से उचित होगा कि इसके विरुद्ध कैसे मजबूत हो उसे खोजे । 

क्योंकि हम 21 दिन क्या  21 माह  भी घर के अंदर छुपे बैठे रहेंगे तो बैक्टीरिया या वायरस की जिंदगी जो  अरबों खरबों वर्ष की होती है इनसे कैसे बचा जाये ।  क्या इसका कोई  निदान होगा ?  इस बीच हो  सकता है कि भारत सरकार भारत के वैज्ञानिक ,  विश्व के कई वैज्ञानिक  कुछ  तोड़ खोज  लें । पर अभी तो तुरंत  हमें ऐसा प्रतीत नहीं होता कि प्रकार डरने से कोई काम बन पाएगा।  हमको  इस प्रकार के डरने और इस प्रकार कायरों की भांति डर को पाले हुए कि कुछ नहीं होगा उस बेक्टीरिया वायरस का वो हवा में चारो ओर है ।  उसे  घर के अंदर बैठकर चुपचाप बैठे रहे देखते रहे कि कही आना कर ना चिपक  जाये हमसे  बजाय,  इसके  कुछ ऐसा हल भी खोजना आवश्यक होगा कि जिसके द्वारा हमारी दैनिक जीवन और  रोजमर्रा की चीजें भी आसानी से चलती रहे और इसका डटकर के मुकाबला भी कर सकें । प्रशासन को इस प्रकार की पाइप लाइन नेटवर्क बनाना परम आवश्यक है जिसके द्वारा हम लोगों की सेवाएं अति आवश्यक सेवाओं के साथ-साथ लोगों को मिलने वाली सेवाएं उनके घर तक भी पहुंच सके।  उनकी कोई जिम्मेदारी जैसे  स्वच्छता  अभियान के समान कचरा ढोने  वाली गाड़ी घरोघर  जा  आ सके तो प्रशासन के द्वारा इस प्रकार की गाड़ियां भी चलानी चाहिए  जिससे कि कमोडिटी के समान ,  चीजों को अब सभी घरों  तक पहुंचाया जा  सकें ।