बच्चाें काे घर छाेड़ अस्पताल से बांट रहीं ममता, बेटी को ड्यूटी पर ले जाती हैं हेडकांस्टबेल, वीडियो कॉल में इंस्पेक्टर मां को देख रो पड़ता है बेटा

कोरोना काल में संक्रमण का खतरा झेलते हुए पीजीआई और सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर्स मॉम ने मां की ममता के साथ मरीजों की सेवा का भी फर्ज निभाया। वहीं, दूसरी ओर पुलिस विभाग में कार्यरत महिलाएं भी ड्यूटी के साथ मां का फर्ज निभा रही हैं। सुबह...

बच्चाें काे घर छाेड़ अस्पताल से बांट रहीं ममता, बेटी को ड्यूटी पर ले जाती हैं हेडकांस्टबेल, वीडियो कॉल में इंस्पेक्टर मां को देख रो पड़ता है बेटा

कोरोना काल में संक्रमण का खतरा झेलते हुए पीजीआई और सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर्स मॉम ने मां की ममता के साथ मरीजों की सेवा का भी फर्ज निभाया। वहीं, दूसरी ओर पुलिस विभाग में कार्यरत महिलाएं भी ड्यूटी के साथ मां का फर्ज निभा रही हैं। सुबह 9 बजे से दोपहर बाद तक चलने वाली ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर्स ने घर में मां और अस्पताल में भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले चिकित्सक का कर्तव्य पालन किया। 24 घंटे चलने वाली ड्यूटी में ऑनकाल उपलब्ध रहने वाले महिला चिकित्सक बच्चों के साथ दो माह से महज चार से पांच ही घंटे ही बिता पा रही हैं।
मदर्स डे पर पीजीआई की रैपिड रिस्पांस टीम में शामिल कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में कार्यरत एमबीबीएस एमडी डॉ. शीबा सेठी और एडिशनल सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. देविंदर कौर, कैथल महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह, फतेहाबद में कार्यरत हेडकांस्टेबल मीना रानी ने कोरोना काल के दौरान किए संघर्ष को भास्कर से साझा किया।

मीना पर ड्यूटी के साथ परिवार की भी जिम्मेदारी
फतेहाबाद में कार्यरत हेडकांस्टेबल मीना रानी पारिवारिक परिस्थितियों के चलते अपनी 10 साल की बेटी को ड्यूटी के दौरान साथ रखती हैं। मीना पर ही परिवार को संभालने की जिम्मेदारी है, क्योंकि उनके पति किन्हीं कारणों से साथ नहीं है। उसकी 10 साल की बेटी तमन्ना है। मीना की ड्यूटी शहर के जवाहर चौक पर लगी है। चूंकि स्कूल बंद हैं, जिसके चलते तमन्ना स्कूल नहीं जा रही। बेटी को साथ रखकर ही अपनी ड्यूटी को निभा रही है। मीना ने बताया कि ड्यूटी निभाना भी जरूरी है तो वहीं बेटी की देखभाल उसका फर्ज है।

बेटा छोटा है तो रोकर कहता है- मम्मा घर आजाओ

कैथल महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह बताती हैं कि दो बच्चे हैं। बेटी याशमीन 11 साल की तो बेटा गौरीश 5 वर्ष का है। पति प्रदीप कुमार भी फिलहाल कैथल के सीआईए 2 के प्रभारी के तौर पर तैनात हैं। मूलरूप से हिसार के रहने वाले हैं। सुबह दाेनाें बच्चाें काे क्वार्टर पर अकेले छाेड़कर ड्यूटी पर चले जाते हैं। दिन में ड्यूटी के दौरान जैसे ही समय मिलता है तो मोबाइल से वीडियो कॉल कर हाल-चाल जानती हूं। बेटा अभी छोटा है तो वह फोन पर कई बार रो कर कहता है मम्मा घर आ जाओ। कब आओगे ये कहकर भावुक हो जाता है। मैं कहती हूं कि अभी टाइम लगेगा, आप गेट अंदर से बंद रखना और रेस्ट कर लो।

बेटी का पहला जन्मदिन था, रात काे किया सेलिब्रेट

डॉ शीबा सेठी बेटी मिष्टी के साथ।

डॉ. शीबा सेठी बताती हैं कि करीब दो माह काफी परेशानी भरे गुजरे। एक साल की बेटी मिष्टी की देखभाल और ड्यूटी करना दाेनाें संभव नहीं था। ऐसे में सांघी अस्पताल में बतौर इमरजेंसी मेडिकल अफसर कार्यरत डॉ. अंकित ने बेटी की चिंता को देखते हुए नाइट ड्यूटी लगवा ली, ताकि दिन में डॉ. शीबा को रैपिड रिस्पांस टीम की ड्यूटी में कोई परेशानी न आ सके। बेटी का 2 मई को पहला जन्मदिन था, ड्यूटी से आने में देर हो गई। पति की हेल्प से जल्दी में केक बनाया और डेकोरेशन करके बेटी का जन्मदिन घर में सेलिब्रेट किया।

बेटी दादी के साथ मिलकर रोज बना रही है मास्क:

डॉ. देविंदर कौर घर में अपने बच्चों के साथ।

सिविल अस्पताल के गायनी विभाग में कार्यरत एडिशनल सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. देविंदर कौर व आर्थो विभाग में कार्यरत चिकित्सक डॉ हरमिंदर सिंह के 11 वर्षीय बेटे जप सिंह और आठ वर्षीय बेटी दियारा सिंह ने बताया कि मां-पापा दोनों डॉक्टर हैं। बेटी दियारा बताती हैं कि मम्मी ने बताया था कि अस्पताल में काफी लोग मास्क के बगैर आते हैं। उन्हें मास्क मिलते ही नहीं। उन्होंने 70 वर्षीय दादी विद्यारानी को कपड़े के मास्क बनाने के लिए राजी किया। दादी और दियारा ने रोजाना 15 से 20 कपड़े के मास्क बनाते हैं।



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ड्यूटी के दौरान अपनी बेटी तमन्ना के साथ हेडकांस्टेबल मीना।